माध्यमिक स्तर पर पढ़ने, लिखने या गणना की कठिनाई अधिक स्पष्ट हो सकती है। DYS शब्द के अलग अर्थ समझें, ठोस अवलोकन साझा करें और विद्यार्थी की आवाज के साथ उपयुक्त सहायता चुनें।

मुख्य बातें

  • “DYS” के पीछे अलग जरूरतें होती हैं
  • माध्यमिक स्तर पर कठिनाई अधिक स्पष्ट क्यों हो सकती है?
  • तथ्य देखें, किसी संकेत से लेबल न बनाएँ

“DYS” के पीछे अलग जरूरतें होती हैं

फ्रांसीसी प्रयोग में DYS कई विकास संबंधी कठिनाइयों के लिए इस्तेमाल होने वाला परिचित समूह शब्द है। पढ़ने में डिस्लेक्सिया, लिखित अभिव्यक्ति या वर्तनी में कठिनाई और संख्या सीखने में डिस्कैल्कुलिया इसके प्रमुख संदर्भ हैं। मौखिक भाषा तथा मोटर समन्वय के विकास संबंधी विकार भी संबंधित चर्चा में आ सकते हैं, लेकिन उनकी अपनी पहचान और मूल्यांकन है।

ADHD अलग न्यूरोविकास संबंधी स्थिति है; वह अधिगम विकार के साथ मौजूद हो सकता है, पर दोनों को एक ही निदान न कहें। किसी विद्यार्थी में एक या कई जरूरतें हो सकती हैं। किसी एक कठिनाई का नाम उसके सारे कौशल, रुचि या बुद्धिमत्ता का स्तर नहीं बताता। “DYS है इसलिए सभी विषयों में ऐसा होगा” जैसी धारणा से बचें।

माध्यमिक स्तर पर कठिनाई अधिक स्पष्ट क्यों हो सकती है?

फ्रांस के collège में प्रवेश पर विषयों, कक्षाओं और शिक्षकों के बीच बदलाव बढ़ सकता है। यह भारतीय विश्वविद्यालय वाले कॉलेज का संदर्भ नहीं है। अलग नोटबुक, काम जमा करने की अलग विधि और लंबा पाठ पहले से मौजूद कठिनाई को अधिक दिखाई देने योग्य बना सकते हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि विकार अचानक पैदा हुआ या विद्यार्थी ने मेहनत बंद कर दी।

एक विद्यार्थी पढ़ते समय अधिक समय लेता हो और ऊपर से उसे नोट भी बनाने हों, तो चर्चा का हिस्सा छूट सकता है। दूसरा गणना जानता हो लेकिन पृष्ठ पर क्रम व्यवस्थित करने में कठिनाई महसूस करे। इन उदाहरणों का उद्देश्य निदान करना नहीं, काम की कई मांगें पहचानना है। सहज दिखने वाले विद्यार्थियों में भी थकान और सहायता की जरूरत पूछें।

तथ्य देखें, किसी संकेत से लेबल न बनाएँ

लगातार पढ़ने में धीमापन, लिखते समय दर्द या बहुत प्रयास, संख्याओं की अवधारणा में मुश्किल अथवा मौखिक निर्देश समझने की कठिनाई ध्यान देने योग्य हो सकती है। लेकिन अक्षर उलटना, उँगलियों पर गिनना या कभी होमवर्क भूलना अकेले किसी विकार का प्रमाण नहीं। एक ही संकेत अनेक कारणों से आ सकता है।

कार्य के उदाहरण, परिस्थिति और दी गई सहायता नोट करें। विद्यार्थी क्या समझता है और किस हिस्से में रुकता है, यह पूछें। खराब अंक से सामान्य निष्कर्ष बनाने के बजाय अलग कामों की तुलना करें। कक्षा में अच्छा बोलना भी यह साबित नहीं करता कि उसकी सारी भाषा क्षमता सुरक्षित है; मूल्यांकन में जरूरत के अनुसार सभी संबंधित पहलू देखे जाते हैं।

परिवार और स्वास्थ्य पेशेवर से रास्ता बनाएँ

लगातार कठिनाई हो तो परिवार के साथ निजी मुलाकात में ठोस उदाहरण साझा करें। स्वास्थ्य, सुनना, देखना, भाषा का अनुभव और अब तक मिली शिक्षा जैसे संदर्भ महत्वपूर्ण हैं। दूसरी भाषा सीखने की कठिनाई को सीधे विकार न मानें। उपयुक्त स्वास्थ्य पेशेवर जरूरत के अनुसार भाषा, गणना, मोटर या अन्य विशेष मूल्यांकन की सलाह दे सकता है।

शिक्षक की भूमिका जानकारी देना और सीखने की सहायता करना है; ऑनलाइन प्रश्नावली या मस्तिष्क के बारे में सामान्य विवरण से निदान नहीं होता। कोई एक स्कैन सभी DYS कठिनाइयों की पहचान नहीं करता। जटिल स्थिति में अलग पेशेवरों का समन्वय जरूरी हो सकता है। प्रक्रिया के दौरान स्कूल में उपयोगी सामान्य सहायता जारी रखने पर भी चर्चा करें।

कक्षा में पहला बदलाव सोचसमझकर चुनें

विद्यार्थी के सामने एक साथ पूरा समाधान न रखें। यदि मुख्य समस्या नकल करते हुए सुनना है तो महत्वपूर्ण नोट उपलब्ध कराना आजमाएँ। यदि काम शुरू नहीं हो पा रहा तो पहला छोटा चरण और अपेक्षित परिणाम स्पष्ट करें। पढ़ने का लक्ष्य हो तो उसका शिक्षण भी जरूरी है; केवल हर पाठ सुना देना सभी जरूरतें पूरा नहीं करता।

साधन इस्तेमाल करने के लिए उसे सीखने का समय दें। कंप्यूटर अपने आप काम व्यवस्थित नहीं करता और हर विद्यार्थी को दृश्य आरेख पसंद आए, यह जरूरी नहीं। सहायता से क्या बदला, इसे विद्यार्थी से पूछें। बेहतर अंक सहायक सूचना हो सकते हैं, लेकिन प्रयास, समझ और थकान भी देखें। सुधार होने से सहायता की जरूरत स्वतः खत्म नहीं हो जाती।

सामाजिक अनुभव और महत्वाकांक्षा का ध्यान रखें

किशोर को सहपाठियों के सामने कठिनाई उजागर होने का डर हो सकता है। उसकी निजी जानकारी साझा करने के तरीके पर बात करें और अनावश्यक सार्वजनिक तुलना से बचें। मजाक, अपमान या विद्यालय जाने से डर की सूचना को गंभीरता से लें। सारी परेशानी को DYS का सामान्य हिस्सा बताकर न छोड़ें।

विषय और भविष्य का रास्ता केवल निदान के आधार पर तय न करें। विद्यार्थी की रुचि, कौशल और आवश्यक सहायता साथ देखें। परिवार को रोज हर उत्तर ठीक करवाने की जिम्मेदारी न दें; घर पर काम का वास्तविक बोझ तथा विश्राम पर बात करें। रोजमर्रा बहुत प्रभावित हो या भावनात्मक परेशानी बनी रहे तो उचित पेशेवर समर्थन जोड़ें।

सहायता की निरंतरता और आगे सीखने का रास्ता

फ्रांस में जरूरत के अनुसार PAP या PPS जैसी औपचारिक व्यवस्थाओं पर चर्चा हो सकती है। इनमें प्रक्रिया और जिम्मेदारियाँ अलग हैं; राष्ट्रीय परीक्षा की सहायता के लिए आवेदन और अनुमति की पुष्टि भी आवश्यक है। संबंधित विद्यालय संपर्क परिवार को वर्तमान नियम समझा सकता है। दूसरे देश में स्थानीय शिक्षा व्यवस्था देखनी होगी।

सीखना सीखने का साधन अपने तरीके पर बातचीत का पूरक हो सकता है। नीचे दिए प्रशिक्षण collège की DYS जरूरतों और व्यापक अधिगम सहायता के विषय हैं। सामग्री को विद्यार्थी की वास्तविक स्थिति से मिलाएँ; प्रशिक्षण पूरा करने से किसी शिक्षक को स्वतः चिकित्सकीय निदान का अधिकार या निश्चित परिणाम नहीं मिलता।

माध्यमिक स्तर की DYS जरूरतों पर प्रशिक्षण
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Collège में DYS को समझना

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विद्यार्थियों की सीखने संबंधी जरूरतों और सहायता पर प्रशिक्षण
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अधिगम कठिनाइयों वाले विद्यार्थियों की सहायता

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या DYS का अर्थ बुद्धिमत्ता कम होना है?

नहीं। किसी विशेष अधिगम कठिनाई से कुल बुद्धिमत्ता या भविष्य की संभावना तय नहीं होती। व्यक्ति की क्षमताएँ और जरूरतें अलग से समझनी होती हैं।

क्या ADHD भी डिस्लेक्सिया का ही रूप है?

नहीं। ADHD और पढ़ने संबंधी विकार अलग स्थितियाँ हैं, हालांकि साथ मौजूद हो सकते हैं। इसलिए एक नाम से सभी जरूरतों का अनुमान नहीं लगाना चाहिए।

क्या माध्यमिक स्तर पर पहली बार पहचान संभव है?

हाँ। बढ़ी हुई मांगों में पहले से मौजूद कठिनाई अधिक दिखाई दे सकती है। उपयुक्त मूल्यांकन और सहायता पर बात करने के लिए देर मानकर रुकना जरूरी नहीं।

क्या समायोजन से सीखने की जरूरत खत्म हो जाती है?

नहीं। पहुँच का सहारा और संबंधित कौशल का शिक्षण पूरक हो सकते हैं। किस तरह की सहायता चाहिए, यह उद्देश्य तथा विद्यार्थी की स्थिति के अनुसार तय करें।

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