तस्वीर, वस्तु, संकेत, लिखित शब्द या आवाज़ उत्पन्न करने वाला उपकरण संवाद के अलग रास्ते हैं। सही चुनाव का आधार व्यक्ति की पहुँच, भाषा और वास्तविक बातचीत है। सहारा उसकी तरफ से निर्णय लेने के लिए नहीं, उसे अपना निर्णय व्यक्त करने देने के लिए हो।

मुख्य बातें

  • संवाद की जरूरत से शुरुआत से शुरुआत करें।
  • डिजिटल पहुँच की जाँच को परिस्थिति के अनुसार अपनाएँ।
  • व्यक्ति की पसंद, आराम और भागीदारी को हर निर्णय में जगह दें।

संवाद की जरूरत से शुरुआत

भोजन माँगने के साथ राय देना, मजाक करना और मना करना भी जरूरी है। पूछें कि अभी किस स्थिति में अपनी बात कहना सबसे कठिन है। किसी व्यक्ति को वस्तु माँगना आता हो फिर भी बातचीत शुरू करना कठिन हो सकता है। बैठकर उसकी पसंद की घटना या विषय पर बात करें। केवल अपनी पूछी बात का उत्तर देना संवाद का पूरा अवसर नहीं है। अगर संदेश समझ न आए तो अंदाजा लगाकर तुरंत काम न करें। कहें कि समझ नहीं आया और दोबारा दिखाने, लिखने या दूसरा तरीका चुनने का अवसर दें। गलत अर्थ की मरम्मत करना सभी बातचीत का स्वाभाविक हिस्सा है।

मौजूदा संकेतों को समझें

व्यक्ति जो संकेत पहले से देता है, उन्हें परिवार के साथ पहचानें। अर्थ को अपनी धारणा न मानें; उपलब्ध विकल्प से पुष्टि करें।

व्यक्ति की जरूरतों के अनुसार सहयोग पर प्रशिक्षण चित्र
व्यक्ति की जरूरतों के अनुसार सहयोग पर प्रशिक्षण चित्र

कागज, तस्वीर और वास्तविक वस्तु

हर व्यक्ति के लिए एक ही प्रतीक स्पष्ट नहीं होगा। परिचित फोटो, बड़ी लिखावट या असली वस्तु में से उपयोगी सहारा आज़माएँ। तस्वीरों में घर के वास्तविक सामान का उपयोग कुछ लोगों को अधिक स्पष्ट लग सकता है। दूसरे व्यक्ति लिखित शब्द पसंद करेंगे। परिचित प्रतीक का अर्थ हर नए साथी को उसी तरह स्पष्ट हो, यह मानकर न चलें। काम या कक्षा में केवल शिक्षक की अनुमति मिलने पर उपकरण खोलना अभिव्यक्ति को सीमित कर सकता है। इसकी उपलब्धता को पानी, चश्मे या दूसरे जरूरी सहारे की तरह दिन की व्यवस्था में सोचें।

डिजिटल पहुँच की जाँच

स्क्रीन का आकार, छूने की सुविधा, आवाज़ और टिकाऊपन देखें। बैटरी खत्म होने पर कागज का सहारा भी उपलब्ध रहे।

संचार साथी का अभ्यास

वयस्क खुद भी प्रतीकों का उपयोग दिखाए और उत्तर का इंतजार करे। हर संकेत को बोलकर दोहराने की शर्त न रखें। प्रशिक्षण में बातचीत के साथी भी अभ्यास करें: संदेश को देखकर रुकना, सही अर्थ की पुष्टि करना और गलत समझ पर सुधार स्वीकार करना। उपकरण खरीद लेना अकेले उस व्यक्ति को सुना जाने का अनुभव नहीं देता। व्यक्ति की उँगली या हाथ को पकड़कर शब्द चुनवाने से संदेश किसका है यह अस्पष्ट हो सकता है। पहुँच संबंधी कठिनाई में स्वायत्त चयन की विधि पर विशेषज्ञ की सलाह लें और उसके अपने संचार को केंद्र में रखें।

वयस्कों की स्वतंत्रता और संवाद पर प्रशिक्षण चित्र
वयस्कों की स्वतंत्रता और संवाद पर प्रशिक्षण चित्र

घर से बाहर समान अवसर

स्कूल, काम, दुकान और स्वास्थ्य सेवा में संचार सामग्री साथ पहुँचनी चाहिए। नए साथी को व्यक्ति की सहमति से जरूरी जानकारी दें।

निजता और निर्णय का सम्मान

निजी संदेश बिना अनुमति न पढ़ें। उपकरण में उपयोगी शब्द जोड़ते समय उसकी पसंद पूछें और असहमति व्यक्त करने का रास्ता रखें। उपकरण के खराब होने या सार्वजनिक जगह में आवाज़ न सुनाई देने की स्थिति पर पहले बात करें। आवश्यक संदेशों की कागज प्रति या दूसरा चयन तरीका रखें। सहारा केवल मेज के एक तय स्थान तक सीमित न रहे।

परिणाम भागीदारी से समझें

देखें कि व्यक्ति स्वयं बातचीत शुरू कर पाता है, सुधार बता पाता है और समझे जाने का अनुभव करता है या नहीं। जरूरत बदलने पर प्रणाली बदल सकती है।

MON DICO

MON DICO: डिजिटल पहुँच की जाँच के संदर्भ में खेल या संवाद का वैकल्पिक सहारा; चिकित्सकीय सेवा से अलग।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या संचार उपकरण केवल बोल न पाने पर उपयोगी है?

नहीं। बोलना कठिन, थकाने वाला या परिस्थिति के अनुसार सीमित हो तो भी दूसरा रास्ता उपयोगी हो सकता है।

क्या महँगा उपकरण हमेशा बेहतर है?

नहीं। उपयोगिता उस व्यक्ति की जरूरत और पहुँच पर निर्भर है। साधारण कागज या तस्वीर भी उपयुक्त हो सकती है।

किसकी राय से प्रणाली चुनें?

व्यक्ति को केंद्र में रखकर संचार विशेषज्ञ और रोज़ के साथियों के साथ चुनाव करें। वास्तविक परिस्थितियों में आज़माना महत्वपूर्ण है।

उपकरण काम न करे तो क्या करें?

पहले देखें कि सामग्री समझने योग्य और पहुँच में है या नहीं। साथी के व्यवहार और शब्दों की उपलब्धता में भी बदलाव की जरूरत हो सकती है।

अपनी ज़रूरत के अनुसार अगला कदम चुनें

एक उपयोगी सहारा चुनकर उसे वास्तविक परिस्थिति में आज़माएँ और प्रतिक्रिया के अनुसार बदलें।