बोली का कम या अनुपस्थित होना संवाद की इच्छा या सोच की अनुपस्थिति का प्रमाण नहीं है। ऑटिस्टिक व्यक्ति को समझने के लिए उसके उपलब्ध तरीकों, समझ, जरूरतों और अपनी पसंद व्यक्त करने के अवसरों को अलग-अलग देखना चाहिए।

मुख्य बातें

  • बोलना, भाषा समझना और बौद्धिक क्षमता एक ही बात नहीं हैं।
  • वैकल्पिक संचार के लिए पहले तय उपलब्धि साबित करने का इंतजार न करें।
  • सहयोग का लक्ष्य व्यक्ति की अपनी अभिव्यक्ति और पसंद तक पहुंच है।

एक शब्द से व्यक्ति की पूरी क्षमता तय न करें

कम बोलने वाला, न बोलने वाला और अलग परिस्थितियों में अलग तरह बोल पाने वाला व्यक्ति एक जैसा अनुभव नहीं रखता। कुछ लोग इशारा, लिखना, आवाज, चित्र या उपकरण से संदेश देते हैं। व्यक्ति के लिए कौन-से शब्द सहज हैं, यह जहां संभव हो उसकी अपनी पसंद के अनुसार रखें।

मौखिक उत्तर न आने से यह निष्कर्ष न निकालें कि व्यक्ति कुछ नहीं समझता। इसके उलट यह भी न मानें कि हर न बोलने वाला व्यक्ति सब कुछ समझता है या असाधारण प्रतिभा रखता है। समझ, अभिव्यक्ति, सीखने और सहायता की जरूरत का सुलभ तथा व्यक्तिगत मूल्यांकन चाहिए। सम्मान किसी खास क्षमता साबित करने पर निर्भर नहीं है।

संदेश देने के मौजूदा तरीकों को पहचानें

व्यक्ति किसी वस्तु की ओर बढ़े, आपको दिखाए, दूर हटे या कोई परिचित आवाज करे तो उसके संदर्भ को समझने की कोशिश करें। अनुमान को अंतिम अर्थ न मानें। जहां संभव हो दोबारा पुष्टि करें और परिवार के बाहर दूसरे सहयोगियों को भी उपयोगी संकेत समझाएं।

एक छोटा विवरण मदद कर सकता है कि व्यक्ति मदद, समाप्ति या असहमति कैसे बताता है। लेकिन हर हरकत का छिपा अर्थ निकालना जरूरी नहीं। व्यक्ति से सीधे बात करें, उत्तर के लिए समय दें और उसके सामने केवल दूसरों से उसके बारे में चर्चा करने से बचें। उम्र के अनुसार सम्मानजनक भाषा और सामग्री रखें।

पूरक एवं वैकल्पिक संचार जल्दी विचार में लें

पूरक एवं वैकल्पिक संचार में इशारे, वस्तु, फोटो, चित्र-पट, अक्षर या आवाज देने वाला उपकरण शामिल हो सकता है। अलग जगह और जरूरत पर एक से ज्यादा तरीका साथ चल सकता है। इसे केवल भोजन मांगने तक सीमित न रखें; सवाल, टिप्पणी, संबंध, दर्द, मजाक और असहमति भी संवाद हैं।

इसके लिए एक तय उम्र, बुद्धि, बोलने की कोशिश या मोटर उपलब्धि पहले साबित करना जरूरी नहीं। संबंधित वाक् एवं भाषा विशेषज्ञ व्यक्ति और परिवार के साथ पहुंच, भाषा, दृष्टि, हाथ का उपयोग और वास्तविक संदेशों की जरूरत देख सकता है। केवल सबसे महंगा या सबसे अधिक चित्र वाला उपकरण चुनना पर्याप्त नहीं है।

सहयोगी भी नया तरीका इस्तेमाल करना सीखें

नया साधन देकर व्यक्ति से अकेले सीख लेने की अपेक्षा न करें। सहयोगी रोजमर्रा की बातचीत में उसका उपयोग करके दिखा सकता है और उपलब्ध हर संवाद तरीके को स्वीकार सकता है। हर संदेश को बोलकर दोहराने की शर्त न रखें। संचार का माध्यम पुरस्कार की तरह रोकना व्यक्ति की अभिव्यक्ति सीमित कर सकता है।

गलती या चूक पर तुरंत दूसरा संदेश चुनवाने के बजाय समय और स्पष्टता दें। चार्ज खत्म होने, उपकरण टूटने या बाहर ले जाने पर विकल्प तैयार रखें। दैनिक मनोरंजन की स्क्रीन और संवाद के लिए इस्तेमाल स्क्रीन का कार्य अलग है; दोनों पर एक जैसा बंद करने का नियम लगाना हमेशा उचित नहीं।

संदेश व्यक्ति का अपना हो, यह सुनिश्चित करें

सुलभ उपकरण की व्यवस्था और किसी दूसरे द्वारा संदेश बनवाना अलग हैं। स्वतंत्र लिखना, अक्षर चुनना या संकेत करना समर्थित किया जा सकता है। लेकिन किसी सहायक के हाथ निर्देशित करने से बने संदेश को बिना सत्यापन व्यक्ति की अपनी बात मान लेना उचित नहीं।

फैसिलिटेटेड कम्युनिकेशन जैसे दूसरे व्यक्ति पर निर्भर तरीके के लिए विश्वसनीय स्वतंत्र अभिव्यक्ति का प्रमाण नहीं है और उससे हानि हो सकती है। संबंधित पेशेवर से ऐसे तरीके चुनें जिनमें चयन वास्तव में व्यक्ति का हो। उसकी बात सुनने का सम्मान प्रमाण की जांच छोड़ना नहीं, बल्कि उसके वास्तविक संदेश की रक्षा करना है।

परेशानी में स्वास्थ्य और परिस्थिति दोनों देखें

अचानक अधिक बेचैनी, भोजन में बदलाव या असामान्य प्रतिक्रिया हो तो दर्द, बीमारी, थकान, दवा या पर्यावरण की वजह भी देखें। बोल नहीं पाने से स्वास्थ्य जांच की जरूरत कम नहीं होती। भाषा या पहले सीखे कौशल का नुकसान दिखाई दे तो स्वास्थ्य पेशेवर से शीघ्र बात करें; उसे अपने आप ऑटिज़्म का तय क्रम न मानें।

शोर या भीड़ कम करना, विराम देना और जरूरत स्पष्ट करना सहायक हो सकता है। हर परेशानी को ध्यान पाने का व्यवहार न मानें और केवल चुप कराना लक्ष्य न रखें। तत्काल गंभीर लक्षण या सुरक्षा खतरा हो तो आवश्यक चिकित्सा सहायता लें। सामान्य लेख संकट या व्यक्तिगत जांच की जगह नहीं है।

स्कूल और वयस्क जीवन में चुनने की जगह बनाए रखें

बच्चे के लिए पढ़ाई तक पहुंच, उत्तर देने के वैकल्पिक तरीके और साथियों से संवाद की व्यवस्था देखें। समझ बताने के लिए केवल तेज मौखिक उत्तर न मांगें। परिवार, शिक्षक और संबंधित पेशेवर आपस में उपयोगी जानकारी साझा करें, लेकिन बच्चे को लगातार परीक्षा का विषय न बनाएं।

वयस्क के लिए सामाजिक गतिविधि, काम, रहने की व्यवस्था और निजी संबंधों में उसका अपना मत केंद्र में होना चाहिए। न बोलना अपने आप किसी विशेष आवास, कार्यस्थल या सीमित जीवन का फैसला नहीं करता। सहायता की जरूरत होने पर भी चुनाव और भागीदारी संभव हैं; निर्णय से बाहर कर देना स्वायत्तता नहीं बढ़ाता।

सहयोग की योजना उम्र और वास्तविक जरूरत से जोड़ें

एक लक्ष्य चुनें जिसे व्यक्ति के जीवन में पहचाना जा सके, जैसे असुविधा बताना या पसंद की गतिविधि चुनना। समीक्षा में केवल शब्दों की संख्या नहीं, संदेश की विविधता, सहजता और भागीदारी देखें। परिवार को प्रशिक्षण के साथ आराम और व्यावहारिक सहायता भी चाहिए; हर दिन की पूरी जिम्मेदारी अकेले उठाना जरूरी नहीं।

नीचे बच्चों और वयस्कों के ऑटिज़्म संबंधी संसाधन अपने-अपने उम्र समूह के सामान्य सहयोग के लिए हैं। किसी विशेष संचार प्रणाली का व्यक्तिगत चयन इनसे अलग है। ऑर्थो मंच का लिंक पेशेवर जानकारी के लिए है; सामान्य संज्ञानात्मक खेल को संचार उपकरण, सभी उम्र का कार्यक्रम या बोलना सिखाने वाला प्रमाणित उपचार न मानें।

ऑटिस्टिक बच्चे और उसके परिवार का सामान्य सहयोग
ऑटिस्टिक बच्चे और उसके परिवार का सामान्य सहयोग

ऑटिस्टिक बच्चे और उसके परिवार का सामान्य सहयोग

प्रशिक्षण का विवरण देखें

ऑटिस्टिक वयस्क की पसंद और दैनिक सहयोग
ऑटिस्टिक वयस्क की पसंद और दैनिक सहयोग

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संबंधित पेशेवरों के लिए ऑर्थो मंच की जानकारी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या न बोलने का मतलब बौद्धिक अक्षमता है?

बोली अकेले बौद्धिक क्षमता नहीं बताती। कुछ लोगों में अतिरिक्त अक्षमता हो सकती है, कुछ में नहीं। उपयुक्त मूल्यांकन और सम्मानजनक सहयोग दोनों जरूरी हैं।

क्या पहले बोलने की पूरी कोशिश करके ही वैकल्पिक संचार लें?

नहीं। संवाद की जरूरत अभी है। विशेषज्ञ के साथ उपयुक्त साधन पर जल्दी विचार किया जा सकता है; निश्चित उम्र या उपलब्धि का इंतजार आवश्यक नहीं।

क्या वैकल्पिक संचार से बोलना बंद हो जाएगा?

उपयुक्त एएसी को केवल इस डर से रोकना उचित नहीं। उसका लक्ष्य प्रभावी संवाद है; हर व्यक्ति में बोली विकसित होने की गारंटी भी नहीं है।

सबसे अच्छी संचार प्रणाली कौन-सी है?

एक सार्वभौमिक प्रणाली नहीं है। व्यक्ति की भाषा, पहुंच, पसंद, संदर्भ और सहयोगियों की तैयारी देखकर तरीके आजमाए और बदले जाते हैं।

अपनी जरूरत के अनुसार अगला कदम चुनें

संसाधन का विवरण, लक्षित पाठक और उपयोग की शर्तें देखकर ही उसे अपने संदर्भ में चुनें।