ऑटिस्टिक बच्चे के साथ बदलाव : तैयारी, संवाद और भरोसे के छोटे कदम
पसंदीदा खेल बंद करके खाने की मेज तक जाना भी कभी बड़ा बदलाव लग सकता है। बच्चे को शायद समझ नहीं आया कि खेल कब दोबारा मिलेगा, अगली जगह बहुत शोर है या वह अपनी बात कह नहीं पा रहा। ऐसे समय में पहला काम जल्दी से सहमति लेना नहीं, बल्कि यह समझना है कि बदलाव में कौन सी बात कठिन पड़ रही है।
हर ऑटिस्टिक बच्चे की पसंद, समझ और संवेदनात्मक जरूरतें अलग होती हैं। एक बच्चे को तस्वीर मदद करती है, दूसरे को लिखे हुए दो चरण और किसी को परिचित व्यक्ति के साथ थोड़ा अतिरिक्त समय। नीचे दिए गए उदाहरण काल्पनिक हैं। इन्हें बच्चे के साथ मिलकर अपनी स्थिति के अनुसार बदला जा सकता है।
मुख्य बातें
- एक कठिन बदलाव चुनें और उससे पहले तथा बाद में क्या होता है, देखें।
- बच्चे को समझ आने वाले संकेत से बताएं कि क्या खत्म होगा और आगे क्या होगा।
- विराम, मदद और असहमति व्यक्त करने का तरीका उपलब्ध रखें।
- योजना का उद्देश्य बच्चे की भागीदारी और आराम है; हर बदलाव पर शांत प्रतिक्रिया की गारंटी नहीं।
1. पहले कठिनाई का सही हिस्सा पहचानें
खेल छोड़ने में परेशानी और स्कूल के दरवाजे पर परेशानी एक जैसी दिखाई दे सकती हैं, पर कारण अलग हो सकता है। पहली स्थिति में अधूरा निर्माण बचाने की चिंता हो सकती है; दूसरी में भीड़, घंटी या अलग होने की चिंता। केवल “बदलाव पसंद नहीं” लिखने के बजाय घटना का क्रम देखें।
काल्पनिक उदाहरण में आरव खिलौने समेटते समय रोता है। परिवार देखता है कि वह बनी हुई रेल की पटरी टूटने से परेशान है। पटरी की तस्वीर लेकर उसे अगली बार जारी रखने की जगह तय की जाती है। यहां समाधान समय बताने से आगे बढ़कर बच्चे के काम को महत्व देने से जुड़ा है।
2. अगला कदम स्पष्ट और समझने योग्य बनाएं
पूरे दिन की लंबी सूची दिखाने की जरूरत हर बच्चे को नहीं होती। शुरू में वर्तमान काम और अगला काम दिखाना पर्याप्त हो सकता है। वास्तविक फोटो, परिचित चित्र या छोटे शब्द वही चुनें जिनका अर्थ बच्चा जानता है। यह भी बताएं कि गतिविधि कहां होगी और उसके साथ कौन रहेगा।
“पहले जूते, फिर बाहर” जैसी बात जानकारी देने के लिए कहें। पानी, शौचालय, आराम या संवाद तक पहुंच को मनचाहा व्यवहार करवाने की शर्त न बनाएं। बच्चा यदि “अभी नहीं” या “मदद” कहता है, तो उस संदेश पर ध्यान दें। दृश्य योजना बच्चे के लिए संदर्भ है, वयस्क का आदेशपत्र नहीं।
समझ की छोटी जांच
चित्र दिखाने के बाद बच्चे को इशारे, नजर, शब्द या अपने संचार साधन से अगला कदम बताने का समय दें। उत्तर देने का एक ही तरीका जरूरी न बनाएं।
3. खत्म करने का समय और तरीका मिलकर तय करें
कुछ बच्चों के लिए पहले से सूचना उपयोगी होती है। कितनी पहले, कितनी बार और किस रूप में बताना है, यह अनुभव से तय करें। बार बार चेतावनी देने से यदि बेचैनी बढ़ती है तो संकेत कम या अलग करें। टाइमर समय का दिखाई देने वाला संकेत हो सकता है; वह अपने आप बच्चे को शांत करने वाला उपकरण नहीं है।
कहानी का पन्ना पूरा करना, आखिरी चित्र सहेजना या खिलौने को तय स्थान पर रखना अंत को समझने में मदद कर सकता है। जरूरी हो तो अगली बार लौटने की बात स्पष्ट करें। स्क्रीन से हटने के लिए भी यही सोच अपनाएं : गतिविधि का अर्थपूर्ण अंत, अगली उपलब्ध गतिविधि और जरूरत होने पर शांत विराम।
4. जगह बदलते समय संवेदनात्मक जरूरतों पर ध्यान दें
कभी कठिनाई गतिविधि बदलने से कम और अगली जगह की रोशनी, आवाज या भीड़ से अधिक जुड़ी होती है। घर से निकलने की तैयारी में रास्ता, इंतजार और पहुंचने की जगह शामिल करें। संभव हो तो कम भीड़ वाला समय या शांत प्रवेश चुनें। बच्चे को पसंद आने वाला परिचित सामान साथ रखा जा सकता है।
बिना पूछे छूना, खींचना या किसी संवेदी तकनीक को हर बच्चे पर लागू करना ठीक तरीका नहीं है। पूछें कि बच्चा किस मदद को स्वीकार करता है। संचार में कठिनाई हो तो उसके परिचित संकेत देखें और उसके सहयोगियों से जानकारी लें। अचानक बदली प्रतिक्रिया के साथ दर्द या बीमारी की संभावना भी जांचनी पड़ सकती है।
5. अप्रत्याशित बदलाव में थोड़ी जानकारी और वास्तविक विकल्प दें
मान लें पार्क बंद है। पहले तथ्य बताएं : “आज पार्क का दरवाजा बंद है।” फिर उपलब्ध विकल्प दिखाएं : पास की खुली जगह या घर लौटकर पसंद का खेल। सभी विकल्प अच्छे लगना जरूरी नहीं। निराशा के लिए जगह रखें और बच्चे को तुरंत खुश दिखने के लिए न कहें।
यदि बच्चा बहुत व्यथित हो, तो लंबी समझाइश रोकें। आसपास की उत्तेजना घटाएं, रास्ता और स्थान सुरक्षित रखें तथा परिचित संचार उपलब्ध करें। बाद में शांत समय पर बात की जा सकती है। चोट या तत्काल खतरे की स्थिति में स्थानीय आपात सहायता और पहले से तय पेशेवर योजना के अनुसार मदद लें।
6. बड़े बदलाव को छोटे परिचित अनुभवों में बांटें
नए स्कूल, नए घर या परिवार के बदलते ढांचे की तैयारी अलग समय मांग सकती है। जितनी पक्की जानकारी हो उतनी ही दें। नए कमरे की तस्वीर, मिलने वाले व्यक्ति का नाम या छोटी पूर्व यात्रा मदद कर सकती है। जिस बात का पता नहीं है, उसे निश्चित बताने के बजाय बाद में जानकारी देने की बात कहें।
बच्चे से पूछें कि कौन सी परिचित चीज वह साथ रखना चाहता है। पुराने और नए कार्यक्रम के बीच कुछ पसंदीदा आदतें बनाए रखने की कोशिश करें। बदलाव के बाद भी प्रश्न और भावनाएं आ सकती हैं। तैयारी का काम पहली मुलाकात पर समाप्त नहीं होता; अनुभव के आधार पर योजना को बदलना उसका हिस्सा है।
7. घर और स्कूल के बीच उपयोगी जानकारी साझा करें
साझा नोट बहुत छोटा हो सकता है : कठिन समय, समझ में आने वाला संकेत, मदद मांगने का तरीका और अब तक उपयोगी रहा बदलाव। अलग जगहों पर हर चीज बिल्कुल समान होना जरूरी नहीं, लेकिन बच्चे को विरोधी संदेश देने से बचना उपयोगी है। उसकी निजता के अनुसार केवल जरूरी जानकारी संबंधित लोगों से साझा करें।
यदि कठिनाई बार बार भागीदारी रोक रही है, बच्चा स्वयं को चोट पहुंचा रहा है या परिवार की योजना काम नहीं कर रही, तो बच्चे की सहयोगी टीम से मूल्यांकन मांगें। संवाद, वातावरण और स्वास्थ्य से जुड़े कारणों को साथ देखना बेहतर योजना बनाने में मदद करता है। केवल अधिक अभ्यास कराना हर समस्या का जवाब नहीं है।
8. परिवार के लिए सीखने के संसाधन कैसे चुनें
संसाधन चुनते समय देखें कि वह बच्चों, परिवार और आपकी वास्तविक जरूरत के लिए बना है। DYNSEO की प्रशिक्षण सूची से विषयों की तुलना की जा सकती है। बच्चे के दैनिक जीवन और भावनात्मक जरूरतों पर बने नीचे के कार्यक्रम उनके परिवारों के लिए जानकारी देते हैं। कार्यक्रम पढ़कर ही तय करें कि आपकी जरूरत से उसका मेल है।
आजमाई गई मदद का मूल्यांकन बच्चे के आराम, अपनी बात कह पाने और गतिविधि में भाग लेने के आधार पर करें। एक बार सहमत हो जाना किसी रणनीति के हर जगह काम करने का प्रमाण नहीं है। उपयोगी संकेत रखें, उलझाने वाले हिस्से हटाएं और बच्चे की पसंद को योजना में स्थान दें।

दैनिक जीवन को समझना
संचार, दिनचर्या और परिवार की भूमिका से जुड़े विषय।
बच्चे के सहयोग वाला कार्यक्रम देखें
भावनाओं और जरूरतों पर ध्यान
बदलाव के समय सहयोग की तैयारी से संबंधित कार्यक्रम।
भावनाओं से संबंधित कार्यक्रम देखेंअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अनुभव अलग होते हैं। कोई बच्चा खास जगह, अनिश्चितता या संवेदनात्मक स्थिति में अधिक परेशान हो सकता है। बच्चे के अपने संकेत और पसंद देखकर सहायता चुनें; निदान के आधार पर सभी के लिए एक जैसी योजना न बनाएं।
टाइमर एक विकल्प है। फोटो, लिखे हुए चरण या गतिविधि का स्पष्ट अंत भी उपयोगी हो सकता है। जो संकेत बच्चा समझता और स्वीकार करता है, उसे चुनें। यदि टाइमर से तनाव बढ़ता है तो तरीका बदलें।
मना करने का अर्थ समझने की कोशिश करें। दर्द, थकान, डर, अधूरा काम या अगली जगह की कठिनाई हो सकती है। जरूरी और टाली जा सकने वाली गतिविधियों में फर्क करके वास्तविक विकल्प दें तथा सुरक्षा की जरूरत पर उचित मदद लें।
शांत और परिचित स्थिति में छोटे, स्वीकार्य विकल्प बच्चे के साथ तय करें। जानबूझकर परेशान करना अभ्यास नहीं है। बताएं कि क्या बदल रहा है, क्या वैसा रहेगा और बच्चा मदद या विराम कैसे मांग सकता है।
यदि बदलाव के समय परेशानी बार बार शिक्षा, भोजन, बाहर जाने या परिवार के जीवन को रोकती है, तो सहयोगी टीम से चर्चा करें। दर्द, बीमारी, चोट या नए गंभीर लक्षणों के लिए स्वास्थ्य पेशेवर की सहायता लें।
अपने परिवार के लिए उपयुक्त जानकारी चुनें
कार्यक्रम में दिए विषय पढ़ें और जरूरत हो तो संसाधन के उपयोग के बारे में पूछें। बच्चे की व्यक्तिगत योजना उसकी सहयोगी टीम के साथ बनाएं।
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