बोलकर बहुत कम या बिल्कुल अभिव्यक्ति न कर पाना, समझ या विचारों के अभाव का प्रमाण नहीं है। कुछ ऑटिस्टिक व्यक्ति इशारों, संकेतों, लिखने, तस्वीरों या संचार उपकरणों से बात करते हैं। उपयोगी सहयोग उनकी आवाज़ को बढ़ाता है और बातचीत में वास्तविक विकल्प देता है।

मुख्य बातें

  • बोलने और संवाद में अंतर समझें से शुरुआत करें।
  • सहायक संचार का मूल्यांकन कराएँ को परिस्थिति के अनुसार अपनाएँ।
  • व्यक्ति की पसंद, आराम और भागीदारी को हर निर्णय में जगह दें।

बोलने और संवाद में अंतर समझें

किसी व्यक्ति का बोलना अलग परिस्थितियों में बदल सकता है। उसके देखने, इशारा करने, शरीर हटाने या कोई वस्तु देने का अर्थ जानने की कोशिश करें; अर्थ को निश्चित मानने से पहले पुष्टि करें। व्यक्ति को सीधे संबोधित करें, उसके बारे में केवल दूसरे वयस्क से बात न करें। उत्तर आने में समय लगे तो सवाल दोहराते रहने के बजाय ठहरें। समझ में गलती हो तो उसे सुधारने का आसान रास्ता दें।

व्यक्ति का मौजूदा तरीका पहचानें

परिवार और व्यक्ति से पूछें कि हाँ, नहीं, दर्द और विराम कैसे व्यक्त होते हैं। वही तरीका स्कूल, घर या देखभाल स्थल में उपलब्ध रहे। हर जगह नया संकेत सिखाना जरूरी नहीं है।

ऑटिस्टिक वयस्कों की स्वतंत्रता और सहयोग पर प्रशिक्षण चित्र
ऑटिस्टिक वयस्कों की स्वतंत्रता और सहयोग पर प्रशिक्षण चित्र

तस्वीर और वस्तु से विकल्प दिखाएँ

दो वास्तविक विकल्प साथ रखें और चयन के लिए समय दें। दिखाए गए विकल्प सचमुच उपलब्ध हों। चुनी हुई गतिविधि का सम्मान करें, ताकि चित्र केवल प्रश्नों का अभ्यास न बन जाए। उदाहरण के लिए, पानी और जूस की तस्वीर साथ दिखाकर चयन पूछें। कोई विकल्प पसंद न हो तो दोनों को अस्वीकार करने की जगह भी रखें। ऐसी पसंद की स्थिति बनाएँ जिसका परिणाम व्यक्ति तुरंत अनुभव कर सके।

सहायक संचार का मूल्यांकन कराएँ

संचार विशेषज्ञ दृष्टि, सुनने, हाथ की गति, भाषा और दैनिक जरूरतों के अनुसार सहारा चुनने में मदद कर सकता है। बोलने की कोई पूर्वशर्त तय करके संचार सहायता रोकना उचित नहीं है।

साथी भी उपकरण का उपयोग करे

बात करते हुए खुद उपयुक्त तस्वीर या शब्द की ओर संकेत करें। तुरंत नकल या सही उत्तर की माँग न करें। व्यक्ति को असहमति, टिप्पणी और सवाल व्यक्त करने का भी अवसर दें। अगर स्क्रीन पर छोटे निशान छूना कठिन हो तो बड़ा आकार, कम दृश्य भीड़ या दूसरे चयन तरीके पर सलाह लें। साथी व्यक्ति का हाथ चलाकर संदेश न बनाए; चयन उसका अपना होना चाहिए।

व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार सहयोग पर प्रशिक्षण चित्र
व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार सहयोग पर प्रशिक्षण चित्र

कक्षा और समुदाय में पहुँच बनाएँ

संचार सामग्री केवल सत्र की मेज पर न रहे। भोजन, खेल, यात्रा और सामूहिक गतिविधियों में उसे साथ रखें। उपकरण की जगह पर व्यक्ति की पहुँच और उसकी निजता दोनों सोचें।

तनाव के समय माँग कम करें

अधिक शोर या थकान में संवाद कठिन हो सकता है। छोटा वाक्य बोलें, पर्याप्त इंतजार करें और विराम दिखाएँ। तकलीफ या अचानक बदली प्रतिक्रिया को केवल ऑटिज़्म से न जोड़ें। केवल विनम्र माँग के शब्द जोड़ने के बजाय «रुको», «यह नहीं», «दर्द» और «मुझे कुछ और कहना है» जैसे उपयोगी संदेश उपलब्ध रखें। शब्दों का चुनाव व्यक्ति की भाषा, संबंधों और जीवन से जुड़ा हो।

भागीदारी को प्रगति का आधार बनाएँ

देखें कि व्यक्ति कितनी सहजता से अपनी पसंद बताता, मदद माँगता या बातचीत शुरू करता है। केवल बोले हुए शब्द गिनना संवाद का पूरा चित्र नहीं देता। उसकी सहमति से सहयोगियों के बीच जानकारी साझा करें।

MON DICO

MON DICO: सहायक संचार का मूल्यांकन कराएँ के संदर्भ में खेल या संवाद का वैकल्पिक सहारा; चिकित्सकीय सेवा से अलग।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कम बोलने का अर्थ कम समझना है?

नहीं। बोलकर अभिव्यक्ति, भाषा समझना और अन्य संज्ञानात्मक क्षमताएँ अलग हो सकती हैं। व्यक्ति की क्षमता का अनुमान केवल उसकी बोली से न लगाएँ।

क्या चित्रों वाला संचार बोलना रोक देता है?

सहायक संचार का उद्देश्य अभिव्यक्ति के रास्ते बढ़ाना है। व्यक्ति की जरूरत के अनुसार बोलना, इशारा और चित्र साथ काम में लिए जा सकते हैं।

कौन सा संचार उपकरण चुनें?

जिसे व्यक्ति आराम से देख, समझ और इस्तेमाल कर सके। विशेषज्ञ के साथ वास्तविक दैनिक परिस्थितियों में विकल्पों को आज़माना उपयोगी है।

क्या केवल जरूरत माँगना सिखाना पर्याप्त है?

नहीं। राय देना, मना करना, मजाक करना, सवाल पूछना और अनुभव साझा करना भी संवाद का हिस्सा है।

अपनी ज़रूरत के अनुसार अगला कदम चुनें

एक उपयोगी सहारा चुनकर उसे वास्तविक परिस्थिति में आज़माएँ और प्रतिक्रिया के अनुसार बदलें।